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हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी में करोड़ों का घोटाला, यूनिवर्सिटी के टीचर्स संगठन के प्रधान मुख्यमंत्री से मिले

बिना लैब बिना उपकरण करोड़ों के बिल हुए पास, जांच में मिले दोषी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं, अब लोकायुक्त ने मांगी रिपोर्ट

Satyakhabarindia

सत्य खबर हरियाणा

Guru Jambheshwar University : हिसार की गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों और शिक्षकों के भ्रष्टाचार से यह साबित हो गया है कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाया गया सरकारी तंत्र यहां फेल हो गया है। बता दें कि हरियाणा राज्य सरकार एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कुलपति प्रो. नरसी राम पर विशेष रूप से नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने के आरोपों की जांच पहले ही शुरू कर चुका है।

बेशक इस मामले में अब लोकपाल की ओर से जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होना भी भ्रष्टाचार रोकने वाली एजेंसियों की विफलता है। रविवार को गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी टीचर्स के प्रेजीडेंट विनोद गोयल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह से इस विषय पर मुलाकात की। विनोद गोयल ने मुख्यमंत्री से कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करने, यूनिवर्सिटी में पारदर्शी और जवाबदेह शासन बहाल करने के लिए तुरंत दखल देने का आग्रह किया।

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वर्ष 1995 में स्थापित हुई हिसार की प्रतिष्ठित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (गुजवि) में वर्ष 2003 में यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग को हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड पंचकूला की ओर से वॉटर एक्ट, 1974 और एयर एक्ट, 1981 के तहत हरियाणा में अलग-अलग इंडस्ट्रियल यूनिट्स से पानी और हवा के सेंपल की टेस्टिंग करने के लिए अधिकृत किया गया था। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नियमों के अनुसार ऐसी टेस्टिंग के लिए एक अलग प्रयोगशाला बनाई जानी थी। सभी तरह की टेस्टिंग बोर्ड की ओर से तय नियम एवं शर्तों के अनुसार ही होनी थी। गुजवि में इस तरह की कोई प्रयोगशाला नहीं बनाई गई। बिना प्रयोगशाला के और बिना किसी जांच के ही जांच रिपोर्ट जारी की जाती रही। इस तरह से पर्यावरण के नियमों और पर्यावरण के साथ खुला खिलवाड़ किया गया। यह काम भी किसी एक व्यक्ति या अधिकारी ने नहीं किया, बल्कि एक के बाद एक अधिकारी मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम देते रहे। हर विभाग के प्रमुख ने अपने रिसर्च स्कॉलर्स के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का वित्तीय घोटाला इस तरह से किया गया।

2014 में सरकार को भेजी गई थी शिकायत

वर्ष 2014 में प्रदेश सरकार को इस संबंध में शिकायत भेजी गई। शिकायत पर सरकार की ओर से विजिलेंस विभाग से जांच कराई गई। पहले विजिलेंस जांच में जांच अधिकारी भूपेंद्र शर्मा की ओर से गुजवि में तत्कालीन प्रोफेसर एवं वर्तमान कुलपति प्रोफेसर नरसी राम बिश्रोई व प्रोफेसर नरेंद्र कुमार बिश्रोई गंभीर आरोपों में दोषी पाए गए। जांच रिपोर्ट में पता चला कि नकली केमिकल बिल जमा करके गबन किया गया। इसमें केस दर्ज करने की सिफारिश विजिलेंस की ओर से की गई। प्रोफेसर नरसी राम की जारी टेस्टिंग रिपोर्ट को नकली बताया गया। क्योंकि जब विभाग के पास कोई टेस्ट मशीन या अन्य उपकरण नहीं थे तो जांच कैसे की गई? प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई। इंडस्ट्रियल यूनिट्स को पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए विभाग के रिसोर्स (टीचिंग के लिए केमिकल और मैटेरियल) का गलत इस्तेमाल किया जाना जांच में पाया गया। इंडस्ट्रियल यूनिट्स से इक्ट्ठा किए गए लाखों रुपये से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की पहचान की गई। रिसर्च स्कॉलर को टेस्टिंग हेड के तहत गलत तरीके से पेमेंट दिखाया गया, जो कि मंजूर ही नहीं है। यह भी पता चला कि प्रोफेसर नरसी राम ने उस समय के कुलपति से सीधे वित्तीय अनुमति (फाइनेंशियल अप्रूवल) ले लिए, जो कि प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं।

खेदड़ प्लांट की पेमेंट में टैक्स में छूट के नाम पर हुआ खेल

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जांच में यह भी पाया गया कि खेदड़ थर्मल पावर प्लांट से मिले पेमेंट में टैक्स छूट के लिए यूनिवर्सिटी का पेन कार्ड ना देकर यूनिवर्सिटी को 13,16,000 रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। विजिलेंस की जांच में प्रो. नरेंद्र कुमार बिश्नोई को हेड बिजनेस डेवलपमेंट के तौर पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करने का भी दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के बाद आरोपियों के खिलाफ क्रिमिनल केस चलाने की सिफारिश की गई।
इसके बाद आरोपियों की दूसरी विजिलेंस जांच की गई। इस जांच में आरोपियों ने खुद को निर्दोष घोषित कराने के लिए अपनी पावर का इस्तेमाल किया। नए जांच अधिकारी शरीफ सिंह ने जांच शुरू की। उन्होंने दोनों आरोपियों को आईपीसी के गंभीर आरोपों से ही बरी कर दिया। हालांकि उन्होंने बिना लैब बनाए ही टेस्ट रिपोर्ट जारी करने और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करने का दोषी तो पाया। उन्होंने विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की। टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने यूनिवर्सिटी को उसी हिसाब से चार्जशीट जारी करने का निर्देश दिया। यूनिवर्सिटी ने यह कहते हुए कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि दोनों जांच में हिस्सा लेने के बाद आरोपियों पर सिविल सर्विस रूल्स लागू नहीं होते।

इस मामले में वर्ष 2018 में लगाई गई आरटीआई और रिकॉर्ड मांगने पर यूनिवर्सिटी ने यह कहते हुए रिकॉर्ड देने से मना कर दिया कि रिकॉर्ड का एक बड़ा हिस्सा गायब है। दोनों विजिलेंस जांच में 14 इंडस्ट्रियल यूनिट्स गायब पाई गईं, लेकिन पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रिकॉर्ड में मौजूद थीं। इन 14 यूनिट्स से पेमेंट कथित तौर पर प्रो. नरसी राम ने गलत तरीके से किया था। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजवि) में करोड़ों रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार मामले में अब लोकायुक्त ने हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 30 दिनों का समय दिया है।

भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है : अशोक बुवानीवाला


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कांग्रेस व्यापार सैल के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने हिसार के नामी सरकारी विश्वविद्यालय गुजवि में इतने वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार की तरफ शासन, प्रशासन और जांच एजेंसियों की नजर नहीं गई। या फिर मिलीभगत से इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जाता रहा। भ्रष्टाचार रहित शासन, प्रशासन देने वाली भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार मुक्त शासन शब्द अपनी डिक्शनरी से निकाल देने चाहिए। क्योंकि यह काम भाजपा सरकार में नहीं हो रहा। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार मुक्त नहीं भ्रष्टाचार युक्त सरकार बन गई है।

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